मैं अलबेली,
घूमूं अकेली,
कोई पहेली हूँ मैं
पगली हवाए मुझे जाहा भी ले जाए
इन हवाओं की सहेली हूँ मैं
हीरनी हूँ बन में,
काली गुलशन में
शबनम कभी हूँ मैं
कभी हूँ शोला
श्याम और सवेरे, सौ रंग मेरे
मैं भी नहीं जानूँ आख़िर हूँ मैं क्या
मेरे हिस्से में आई हैं कैसी बेताबिया
मेरा दिल घबराता है मैं चाहे जाऊं जाहा
मेरी बेचैनी ले जाए मुझको जाने कहाँ
मैं एक पल हूँ यहाँ
मैं हूँ एक पल वहाँ
हीरनी हूँ बन में,
काली गुलशन में
शबनम कभी हूँ मैं
कभी हूँ शोला
श्याम और सवेरे,
सौ रंग मेरे
मैं भी नहीं जानूँ आख़िर हूँ मैं क्या
ह्म, ह्म, मैं वोह राही हूँ जिसकी कोई मंज़िल नहीं
मैं वोह अरमान हूँ जिसका कोई हासिल नहीं
मैं हूँ वोह मौज के जिसका कोई साहिल नहीं
मेरा दिल नाज़ुक है
पत्थर का मेरा दिल नहीं
मैं हूँ रनगीली, हो
मैं हूँ सजीली, हो
हीरनी हूँ बन में, काली गुलशन में
शबनम कभी हूँ मैं कभी हूँ शोला
श्याम और सवेरे, हाँ, सौ रंग मेरे, हाँ
मैं भी नहीं जानूँ आख़िर हूँ मैं क्या....
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hεhε hαhα hΘhΘ....ßĔ ŚМĨĹĨŃĞ ßĔ ŚĤĨŃĨŃĞ...ÁĹŴÁŶŚ
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